शुक्रवार, 22 अगस्त 2008

यह है परीक्षा की घडी

घोर छाया हो अँधेरा, चुभती हो शुलो सी राहें
रूह भी जब थक चुकी हो, मुश्किले फैलाती बाहें
कुछ नहीं आता समझ में, सुन ये पथिक तुम ध्यान देना
यह है परीक्षा की घडी, कुछ धैर्य से तुम काम लेना

4 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा ने कहा…

kam shabdon ke saath ek bahut gambheer bhaw ka varnan kiya hai........

विक्रांत बेशर्मा ने कहा…

कम शब्दों में प्रभावशाली अभिव्यक्ति !!!!!!!!!!!!!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

Good one!

Dev ने कहा…

Sant Bahi
Muskilo, dard, pida par
jo aapki kavita hai
Bahut GAhari hai.....
Aur lilhiye es tarah ki
kavitaye.....
Jarurat hai logon ko
dard sahane ke liye aisi kavitao ka.
Mukt karti hai aisi kavitaye...

Regards...

एक टिप्पणी भेजें