शनिवार, 29 नवंबर 2008

अंतरघात

राष्ट्र की अखंडता नित हो रही आहात,
दुश्मन बड़ा शातिर, लगा जाता नए आघात
मुश्किल बड़ा उनको निपटना, दिखती नहीं वो बात
है चोट दे जाती जो, है अपनों का अंतरघात

अक्सर कोई शत्रु, राष्ट्र के आँगन में घुस आता है,
निश्चय ही कही सीमा प्रहरी, ईमान बेच कर खाता है
आँगन में आकर भी वो भला, क्यु पहचाना नहीं जाता है ?
आपना ही कोई रक्षक बनता, वह शरणागत हो जाता है

फिर धीरे धीरे वह घर के, भेदी की टोह लगाता है,
दुर्भाग्य बड़ा, वह अपनों में, दुश्मन की फौज बनता है
फिर समय देखकर, अपने ही अपनों का लहू बहाते है,
दुश्मन, बैठा दूर सुरक्षित, मुस्काते, ईठलाते है

अब मासूमों की चिता-राख से, जमकर होली चलती है,
अफ़सोस इन्ही घटनाक्रम में, अब राजनीत जो पलती है
दुश्मन कायर, हम सबल, नहीं मंशा पूरी होने देंगे,
मीठा लगता यह गान, चलो एक बार और फिर सुन लेंगे

है समय नहीं निज कायरता, का दोष और पर मढ़ने का
है वक़्त बीच आपनो के बनी खाई को भरने का
गर हुए एक, फिर शत्रु की, घृणित हर मुहीम बिफल होगी,
आतंक मिटेगा जन जन से, उन्नति की चाह सफल होगी

8 टिप्पणियाँ:

नारदमुनि ने कहा…

very good thinking. narayan narayan

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना है।बधाई स्वीकारें।

राष्ट्र की अखंडता नित हो रही आहात,
दुश्मन बड़ा शातिर, लगा जाता नए आघात
मुश्किल बड़ा उनको निपटना, दिखती नहीं वो बात
है चोट दे जाती जो, है अपनों का अंतरघात

We hate Pakistan ने कहा…

जिहाद के नाम पर ये फैलाता है जूनून

मासूमों का खून बहाकर पाक को सुकून


आप भी, अपना आक्रोश व्यक्त करे

http://wehatepakistan.blogspot.com/

Akshaya-mann ने कहा…

main apne desh par garv karta huin..
aur uske sath mei aap par garv karta huin...
aur isse jyada kuch nahi khe sakta....

एक दर्पण,दो पहलू और ना जाने कितने नजरिये /एक सिपाही और एक अमर शहीद का दर्पण और एक आवाज
अक्षय,अमर,अमिट है मेरा अस्तित्व वो शहीद मैं हूं
मेरा जीवित कोई अस्तित्व नही पर तेरा जीवन मैं हूं
पर तेरा जीवन मैं हूं

अक्षय-मन

Devesh ने कहा…

Sundar rachana....
BAdhai

रश्मि प्रभा ने कहा…

समय की प्रमुख मांग को सशक्त बनाया है,
एक-एक शब्द देश के प्रति जागरूकता मांग रहे हैं,
बहुत अच्छी कविता कहूँ या देशभक्ति ........पर जबरदस्त

प्रहार - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

बेहतरीन रचना है . बधाई .

Harkirat Haqeer ने कहा…

अब मासूमों की चिता-राख से, जमकर होली चलती है,
अफ़सोस इन्ही घटनाक्रम में, अब राजनीत जो पलती है
दुश्मन कायर, हम सबल, नहीं मंशा पूरी होने देंगे,
मीठा लगता यह गान, चलो एक बार और फिर सुन लेंगे

देशभक्ति की बेहतरीन रचना .... बधाई .!

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