शनिवार, 27 दिसंबर 2008

समय बलवान होता है ..



तनिक सामर्थ्य पा, अक्सर बली अभिमान होता है,
मनुज, ठोकर लगे ना, दर्द से अनजान होता है
समय-निधि रेत पर, कितने घरौंधे रोज बन मिटते,
न जीता जा सका बन्धु, समय बलवान होता है


युगों पहले धारा पर वक़्त एक, दसशीश था आया,
गगन भी था प्रकंपित, अजेय जो सामर्थ्य था पाया
दशा विपरीत जब आई, न क्षण भर भी वो टिक पाया,
बुरे कर्मो का तो भरना, बुरा परिणाम होता है,
न जीता जा सका ........


वक़्त ने ली नयी करवट, अहम् का बीज फिर फूटा,
सुत प्रेमवद्ध एक भूप ने, निज भ्रात हित लूटा
शत-पुत्र, सारे मर मिटे, नहीं विष बेल फल पाया,
अतिक्रमण अधिकार का हो जब, यही अंजाम होता है,
न जीता जा सका ............


काल पश्चिम का फिर आया, व्योम सा जग पे जो छाया,
न क्षण-भर को मिली राहत, दिवाकर भी था घबराया
अहम् के श्रृंग से टूटा यू, धारा पर निज सिमट आया,
यहाँ तो हर उदय का, निश्चित कभी अवसान होता है,
न जीता जा सका ............

12 टिप्‍पणियां:

  1. तनिक सामर्थ्य पा, अक्सर बली अभिमान होता है,
    मनुज, ठोकर लगे ना, दर्द से अनजान होता है
    समय-निधि रेत पर, कितने घरौंधे रोज बन मिटते,
    न जीता जा सका बन्धु, समय बलवान होता है

    wah kya baat kahe di hai ki jo log apni jara si taqat par abhimaan karte hain unhe kya pata samay balwaan hota hai

    aapki is rachna main zindgi ke har tathy se parichay karaya gaya hai

    aham zindgi main sabse bura hai aur sawabhimaan bina insaan murda hai

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  2. तनिक सामर्थ्य पा, अक्सर बली अभिमान होता है,
    मनुज, ठोकर लगे ना, दर्द से अनजान होता है
    समय-निधि रेत पर, कितने घरौंधे रोज बन मिटते,
    न जीता जा सका बन्धु, समय बलवान होता है
    .........अभिमान तो हमेशा नाश का कारण बँटा है,समय की ताकत से कौन जीत सका है भला......
    ये कविता बहुत अलग-सी,काफी गहन अर्थ से पूर्ण है

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  3. काफी संजीदगी से आप अपने ब्लॉग पर विचारों को रखते हैं.यहाँ पर आकर अच्छा लगा. कभी मेरे ब्लॉग पर भी आयें. ''युवा'' ब्लॉग युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अभिव्यक्तियों को सार्थक रूप देने के लिए है. यह ब्लॉग सभी के लिए खुला है. यदि आप भी इस ब्लॉग पर अपनी युवा-अभिव्यक्तियों को प्रकाशित करना चाहते हैं, तो amitky86@rediffmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं. आपकी अभिव्यक्तियाँ कविता, कहानी, लेख, लघुकथा, वैचारिकी, चित्र इत्यादि किसी भी रूप में हो सकती हैं......नव-वर्ष-२००९ की शुभकामनाओं सहित !!!!

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  4. एक सटीक और सधे हुए शब्दों वाली उत्तम रचना "समय बलवान होता है"...
    ये बहुत ही ऊँची रचना है...
    इस रचना को पढ़कर ऐसा लग रहा है जैसे किसी महाकवि की रचना पढ़ रहा हूं...
    बिल्कुल सच है जितना भी कहा है आपने....
    सधे हुए शब्दों में अपनी बात को सरलता से दर्शाया है.....
    और ब्लॉग भी बहुत अच्छा लग रहा है.........
    शुभकामनाय.....

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  5. नया साल...नया जोश...नई सोच...नई उमंग...नए सपने...आइये इसी सदभावना से नए साल का स्वागत करें !! नव वर्ष-२००९ की ढेरों मुबारकवाद !!!...नव-वर्ष पर मेरे ब्लॉग "शब्द-शिखर" पर आपका स्वागत है !!!!

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  6. अतिसुन्दर...नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है. आप सभी को सपरिवार नव-वर्ष पर हार्दिक शुभकामनायें !!

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  7. ...नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है. आप सभी को सपरिवार नव-वर्ष पर हार्दिक शुभकामनायें !!
    www.kkyadav.blogspot.com पर नव-वर्ष के स्वागत में कुछ भवभिव्यक्तियाँ हैं, आप भी शरीक हों तो ख़ुशी होगी.

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  8. यहाँ तो हर उदय का निश्चित कभी
    अवसान होता है .....
    जिंदगी को बहोत करीब से जान लेने की प्रक्रिया
    को दर्शाती हुई एक शानदार कविता ...
    बधाई !!
    ---मुफलिस---

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  9. bahut hi raspoorn aur saartak kavita , zeevan ki aur ek naye drishtikon ko darshane wali nazam..

    badhai ..


    vijay
    Pls visit my blog for new poems:
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

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  10. बिल्कुल सही लिखा है |
    बधाई|
    अवनीश तिवारी

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  11. तनिक सामर्थ्य पा, अक्सर बली अभिमान होता है,
    मनुज, ठोकर लगे ना, दर्द से अनजान होता है
    समय-निधि रेत पर, कितने घरौंधे रोज बन मिटते,
    न जीता जा सका बन्धु, समय बलवान होता है
    बहुत सुंदर, शर्मा जी! नए साल की बधाई!

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