गुरुवार, 3 जून 2010

रिश्तों के रखाव में : पति-पत्नी के रिश्ते को समर्पित



रिश्तों के
रखाव में
सहजता का
अभाव क्यों ?

अटूट
रहा
एक - दूजे
के प्रति
राम-सीता
का
प्रेम,
विश्वास,
समर्पण |

वक़्त की
आंधियाँ
हारती
गयी,
निखारती
गयी,
उनके
चिर-स्थाई
व्यवहार
को,
वनवास,
हरण,
त्याग
की
कसौटियों
पर
कस - कस
कर,

परन्तु
आज
इन रिश्तों में,
अल्प मुद्दों
पर ही,
उमड़ पड़ता
बिखराव क्यों ?

रिश्तों के
रखाव में
सहजता का
अभाव क्यों ?

(नायेदा जी की काव्य श्रंखला से प्रभावित)

2 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

rishton kee maryada aapsi samajh aur aapsi maryada se tay hoti hai

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

Rishto ke rakhaw me sahajta ka abhav kyon?? Kyonki aapne bataya to..........prem, viswas, samarpan, tyag ki kami hoti ja rahi hai....:(

ek sargarbhit rachna!!

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