मंगलवार, 15 जनवरी 2008

जिंदगी यूँ ही ना बीते

जिंदगी
यूँ ही
ना बीते,
यूँ ना
पूरी हो
कहानी,
आजकल की
उलझनों में,
बीत जाये ना
जवानी |

चाह
और
उत्साह के,
जो नभ हैं
रौशन सितारे,
टूट कर
कहीं
धुल में,
मिल जाएँ
ना
सारे के सारे |

मन की
गति से
भी अधिक,
है
तेज चलती
वक़्त धारा,
आज है
जो
हाथ तेरे,
कल ना
होगा
वह तुम्हारा |

कल की
आशा में
है क्यों,
तू
आज को
बेजा बिताता,
आज की
तू आज
कर ले,
कल की
जाने
वो विधाता |

श्रेष्ट
तुझको
तन मिला,
कुछ श्रेष्टतम
तुझको
है पाना,
आया
है तू,
तुझको है
जाना,
कर जो
जाने
ये जमाना |

तेरी जिंदगी
सार्थक
यूँ बीते,
कुछ बने
ऐसी कहानी,
राह
तेरी
चल पड़े,
लाखो करोडों
जिंदगानी |

1 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा ने कहा…

तेरी जिंदगी सार्थक यू बीते, कुछ बने ऐसी कहानी
राह तेरी चल पड़े, लाखो करोडों जिंदगानी........
इसे कहते हैं हौसला,जीने का सही जज्बा.
बहुत ही सुन्दर बन पड़ा है.......

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