नया कुछ कर जाने की आशा.
सुख-दुःख के इस धुप-छाँव में,
सुख-दुःख के इस धुप-छाँव में,
राह दिखाती अभिलाषा |
वो दूर गगन के तारे,
वो दूर गगन के तारे,
लगते है मुझको प्यारे,
जी चाहे हाथ बढाकर,
जी चाहे हाथ बढाकर,
मुट्ठी में भर लू सारे |
वो कल-कल बहती नदियाँ,
वो कल-कल बहती नदियाँ,
निर्मल स्वच्छंद सी धारें,
कुछ दूर बहू मैं उन संग,
कुछ दूर बहू मैं उन संग,
दिल सोचे बैठ किनारे |
वो कलरव करते पंक्षी,
वो कलरव करते पंक्षी,
भरते उन्मुक्त उडाने,
क्यों उड़ूँ न मैं भी उन सम,
क्यों उड़ूँ न मैं भी उन सम,
यह सरहद क्यूँ हम माने |
है चाह अनेकों दिल में,
है चाह अनेकों दिल में,
कितनी दू परिभाषाएं,
हर रोज न जाने कितनी,
हर रोज न जाने कितनी,
बनती मिटती आशाएं |
